मंगलवार, 11 मई 2010

एक नमूना

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' क्यों डॉ.राय ,' मंजु ने आवाज़ दी ,'पिछली बार तो आपने लड़कों को वाक-आउट करा दिया था कि पेपर आउट ऑफ़ कोर्स जा रहा है ,एकदम बेतुका... !
डॉ राय चलते से रुक कर खड़े हो गये हम काहे को कराते लड़कों ने कहा तो हमने भी अपनी राय दे दी ।'
' इस साल तो आपके छात्र परम संतुष्ट होंगे ,आपका सेट किया हुआ पेपर जो था ।'
'डॉ मंजु ,वह किस्सा भी सुन लीजिये - लड़के पेपर दे कर निकले तो हम बड़े खुश-खुश उनके पास पहुँचे ।
सोचा था बहुत संतुष्ट होंगे ।हमने पूछा ,'क्यों अबकी बार पेपर कैसा रहा ?'
'जी सर ,पता नहीं किस हरामी ने सेट किया था ,ढंग के क्वेश्चन ही नहीं फँसे ।'
दूसरा बोला ,' एक्ज़ामिनर साला ,भाँग खा के बैठा होगा ।अरे हर खंड के कुछ खास कोश्चन होते हैं वह गधा उन सबको चर गया ,भाषा ही बदल डाली ।समझ में आता क्या खाक ! '
 'कमाल है ,' हमारे मुँह से निकला और
एक सम्मिलित ठहाका वातावरण में गूँजने लगा ।
यह है विश्वविद्यालय के छात्रों का एक नमूना ।
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1 टिप्पणी:

  1. Pratibha ji...इत्ता तो आजकल स्कूल के बच्चे ही कह लेते हैं......ज़माना तेज़ी पर है.....और मजाल है कोई अपने प्रोफ़ेसर या शिक्षकगणों को सम्मान दे दे उनकी पीठ पीछे.....सो मैं इस दृश्य से सहमत नहीं....आपने सेंसर की कैंची चलाई है अवश्य ही...:)

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